परिचय (Introduction)
G-Sec यील्ड में उछाल के चलते बॉन्ड बाजार में बढ़ती चिंता के बीच भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ाने के लिए तय समय से पहले ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत सरकारी बॉन्ड खरीदने का ऐलान किया है। इस कदम का मकसद बढ़ती बॉन्ड यील्ड पर लगाम लगाना और बाजार में स्थिरता लाना है।
₹1 लाख करोड़ के OMO खरीद ऑक्शन का ऐलान
RBI अब ₹1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड दो चरणों में खरीदेगा:
- ₹50,000 करोड़ — 29 जनवरी 2026
- ₹50,000 करोड़ — 5 फरवरी 2026
पहले ये ऑक्शन 5 फरवरी और 12 फरवरी को होने थे, लेकिन मौजूदा बाजार हालात को देखते हुए इन्हें पहले कर दिया गया है।
बैंकिंग सिस्टम में नकदी क्यों घटी?
26 जनवरी 2026 को बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस केवल:
- ₹56,987 करोड़ रहा
जबकि सामान्य तौर पर यह आंकड़ा ₹1.50 से ₹2 लाख करोड़ के बीच होना चाहिए।
इसके पीछे प्रमुख कारण:
- रुपये में कमजोरी
- एडवांस टैक्स भुगतान
- GST से जुड़े नियमित आउटफ्लो
- सरकारी बॉन्ड की भारी सप्लाई
10-वर्षीय G-Sec यील्ड 11 महीने के उच्च स्तर पर
बाजार में दबाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि:
- 10-वर्षीय G-Sec (6.48% GS 2035)
- यील्ड 6 बेसिस पॉइंट बढ़कर 6.72% पर पहुंच गई
- यह 11 महीनों का उच्चतम स्तर है
- बॉन्ड की कीमत करीब 42 पैसे गिरी
रेपो रेट कट के बावजूद यील्ड क्यों ऊंची है?
एक रिपोर्ट के मुताबिक:
- RBI फरवरी 2025 से अब तक
- 125 बेसिस पॉइंट रेपो रेट कट कर चुका है
- मौजूदा रेपो रेट: 5.25%
इसके बावजूद लंबी अवधि की सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी नहीं आई है।
ग्लोबल फैक्टर्स ने भी बढ़ाया दबाव
बॉन्ड बाजार की धारणा कमजोर होने के पीछे कुछ अंतरराष्ट्रीय कारण भी हैं:
- कमजोर रुपया
- भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर अनिश्चितता
- भारत के बॉन्ड को ग्लोबल इंडेक्स में शामिल करने में देरी
इसके अलावा, इस हफ्ते सरकारी बॉन्ड और स्टेट डेवलपमेंट लोन की ज्यादा सप्लाई ने भी बाजार पर दबाव बनाया।
OMO खरीद से बाजार को क्या फायदा होगा?
RBI की इस कार्रवाई से:
- बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ेगी
- बॉन्ड यील्ड को सपोर्ट मिलेगा
- बाजार में भरोसा लौटेगा
- क्रेडिट फ्लो बेहतर हो सकता है
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी सुधार के लिए वैश्विक संकेत और मुद्रा स्थिरता भी जरूरी होगी।
निष्कर्ष
G-Sec यील्ड में उछाल के बीच RBI द्वारा OMO खरीद ऑक्शन पहले करना यह दिखाता है कि केंद्रीय बैंक बाजार स्थिरता को लेकर सतर्क है। यह कदम अल्पकाल में राहत दे सकता है, लेकिन आगे की दिशा वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू लिक्विडिटी पर निर्भर करेगी।
👉 आप इस फैसले को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. OMO क्या होता है?
RBI द्वारा बाजार से सरकारी बॉन्ड खरीदने या बेचने की प्रक्रिया को OMO कहते हैं।
Q2. RBI OMO क्यों करता है?
बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ाने या घटाने के लिए।
Q3. G-Sec यील्ड बढ़ने का मतलब क्या है?
बॉन्ड की कीमत गिरना और उधारी महंगी होना।
Q4. क्या इससे आम निवेशकों को फायदा होगा?
हां, बॉन्ड और फिक्स्ड इनकम मार्केट में स्थिरता आ सकती है।
Ashish Rai is a professional automotive writer with four years of experience crafting reviews, features, and technical guides. Passionate about vehicles, he translates complex engineering concepts into engaging content. Covering market trends, EV developments, and driving experiences, Ashish delivers insightful, reader-friendly articles that ignite automotive enthusiasm worldwide consistently with integrity.